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URDU.

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A.

41

Narwar کے شہزادے کے مرنے پر اس کے بھائی نے حکومت غصب کر لی اور شہزادے کے شیرخوار بچے کو وراثت سے محروم کر دیا ۔ اس کے بعد بیوه شهزادی غریبانه لباس پہن کر بچے کو نوکری میں رکھ کر اس کو اپنے هاتهه مین لے پچهم طرف روانه هوئی یہان تک که پہونچی ایک شہر میں جو موجوده جیپور سے پانچ میل کے اندر ھے . بھوک اور ماندگي سے پریشان ھوکر اس نے اپنے بیش قیمت بوجهه کو زمین پر رکھ دیا اور کچهه جنگلی پهل توڑنے لگی که اس نے دیکها که ایک سانپ پهن مارے هوے اپنا دھر نوکری پر ارئهاے هویے ھے اس نے ایک چیخ ماری جس نے ایک راهگير برهمن کو متوجہ کیا • برهمین نے اس سے کہا مت گھبرا بلکه لرکے کے آینده برائی کی اس یقینی نشانی پر خوش هر . ليکن مادر ناتوان نے جواب دیا ” زمانه آینده مین جو هو مین پروا نہیں کرتی ۔ مگر میں تو بھوک سے گری جاتي هون » . إس پر برھمن نے آینده شهر کا راستہ اسے دکھا دیا اور کہا که وهان تیری ضرورتیں رفع هو جائیں گی، نوکری کو لے کر وه شهر مین پہونچی جو پہاڑیوں سے گھرا هوا ھ اور ایک عورت کو جو اتفاقا اس جگہ کے راجاکی لونڈی تهی مخاطب کرکے کھانے پر خادمه کی نوکری کی خواستگار هوئی . رانی کے حکم سے وہ لونڈیون کے ماتهه نوکر رکھی گئی . ایک روز اس کو کهانا طیار کرنے کو حکم دیا گیا ۔ اور راجہ نے اس کھانے کو کھاکر اس قدر اعلے اب

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و

معمولی کھانے سے پایا که اسنے پکانے والی کو بلا بهيجا اس نے اپنی داستان بیان کی. جیون هي راجہ نے اس نامور جلاوطن کا مرتبه دریافت کیا اس کو به طور اپنی بہن اور لڑکے کو به طور اپنے بھانجے کے اختیار کیا ء

کے

B.

! ایک روز Christopher Columbus کی Ferdinand اور Isabella کے ساتهه

کهانا کهانے کی دعوت کی گئی ۔ اس Genoa والے کو جو اعزا بافراط عطا کئے گئے تو ان پر حسد کرنے والے مہمانوں میں ایک نے چالاکی سے اس سے پوچھا کیا تم خیال کرتے هو اگر تم پیدا نه هوتے تو دوسرا کوئی شخص نئی دنیا کو دریافت نہیں کر سکتا . کلمبس نے کوئی جواب نه دیا

۔ کیون که اس کو خوف هوا که اپنے مہمات کے بارے میں با تو بہت زیاده یا بہت کم کہا جاے . لیکن ایک بیضه اپنی انگلیوں کے بیچ لیکر ره مهمانون کیطرف متوجه هوا اور ان سے کها که اس کو اس کے کسی ایک کنارے پر کھڑا کر دین

ان میں کوئی بھی نہ کر سکا . تب كملبس نے بيضه کر اس کے ایک کنارے پر توڑ دیا اور اس نور نے هر کنارے پر رکها کے اپنے حریفوں کو بتایا کہ کسی خیال مین جو در حقیقت بهت سیدھا ساده و کوئی بھی ومف نہیں ملا لیکن پھر بھی کوئی اس کا خیال نہیں کر سکتا اگر ایک موجد پہلا راسته نه بتلا دیتا • إس رو سے اپنی دریافت کی اصلیت خدا کی طرف منسوب کی مگر اول هرنے کی تعریف صرف اپنے لئے دعوی کی

نه

URIYA.

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A.

ନଙ୍କର ଗଜ୍ୟର ଗଜା ମରଗଳ୍ପରୁ, ତାଙ୍କୁ ଗୁଇ ସେ ଗୁଜ୍ୟକୁ ବଳପୂର୍ବକ ଅଭୃସାଇ କରି ଉକ୍ତ ସଜାଙ୍କର ଶିଶ୍ନ ପୁ କୁ ପିଣ୍ଡୁକ ଅଧୁକାରରୁ ବଞ୍ଚିତ କଲେ । ଭର୍ତ୍ତି ବଧବା ଗୁଣୀ ଅଭ ୩ନବେଶ ଧାରଣ କର ଶିଶୁ କୁ ଗୋSଏ

କେଇରେ ରଖି ଏବଂ ସେହି କେଇ ହାତରେ ଧରି ପଶ୍ଚିମ-ଅଭମୁଖରେ ପଳାୟନ କଲେ ଏବଂ କରୁ କାଲ ପରେ ଅଧୂଳକ କପୁର ନଗରର ୫ ମାଇଲ ମଧ୍ୟରେ ସୁବା ଗୋଟିଏ ସହରରେ ପହୃଲେ । କ୍ଷୁଧାରୀ ଓ କ୍ଲାନ୍ତ ହୋଇ ସେ ଭାହାଙ୍କର ଅମୂଳ୍ପ ଘରକୁ ଭୁମିରେ ରଖି ଦେଇ କେତେ ଗୁଡିଏ ବଣ-କୋଲି ତୋଲୁଲେ; ଏମନ୍ତ ସମୟରେ ସେ ଦେଖିଲେ ଯେ ଗୋ&lଏ ଫଣଧର ସର୍ଷ ଅପଣାର ଦେହକୁ 5କେଇ ଉପରେ ଉତ୍ତମିଭ କୟ ରଖିଅଛୁ । ସେ ତାହା ଦେଖି ଚିକ:ର କରନ୍ତେ, ଜଣେ ଭ୍ରମଣକାଶ ବ୍ରାହ୍ମଣ ସେ ରିକାର ଶୁଣି ସେ ସ୍ଥାନକୁ ଅସି ଜାହାଙ୍କୁ କହିଲେ, “ ସ୍ୱଭ ହୁଏ ନାହିଁ, ବରଂ ଏହାକୁ ବାଇକର ଭଷ୍ୟଜ୍ ଏଣ୍ଟର୍ସର ନଣ୍ଟିଭ ସୁଚନ ମଣି ଆନନ୍ଦିତ ହୃଏ ।” କିନ୍ତୁ ସେହି ଅନାହାର &। ଜନଜ୍ଞ ଉତ୍ତର କଲେ ଭବିଷ୍ୟତରେ କ ଘବ, ତାହା ଘୁଲି କଣ ହେବ ?; ମୁଁ ଏହ ହଣି କ୍ଷୁଧାରେ ମର ଯାଉଅଛୁ । ତହୁଁ ସେ ବ୍ରାହ୍ମଣ ନକସ୍ଥ ନଗରକୁ ଯିବା ପଥ ବଢାଇ ଦେଲେ ଏବଂ କହିଲେ “ ସେ ନଗରରେ ଭୁମ୍ଭର ସମସ୍ତ ଏବ ଦୂର ହେବ ।”” କେଇ& ଘେନ ସେ ଗିର-ବେଷ୍ଟିଭ ସେହି ନଗରରେ ପଢ଼ିଲେ ଏବଂ ସେଠାକାର ଗଜାଙ୍କର ଗେ।&ଏ ଦାସୀକୁ ବା୪ରେ ଭେଛି ନଜ ଖବକା ବିବାହ ନିମିତ୍ତ ଦାସୀ-କର୍ମ ପ୍ରାର୍ଥନା କଲେ । ସେଠାକାର ଋଣୀଙ୍କର ଏଦେଣରେ ସେ ଦାସୀ-କର୍ମରେ ନିଯୁକ୍ତ ହେଲେ । ଦନେ ସେ ଗନ୍ଧିବା ପାଇଁ ଅଦୃଷ୍ଟି ହେଲେ ଏବ ଗୁଜା ତାଙ୍କ ସ୍ତ୍ରୀ ର ରନ୍ଧା ଖାଦ୍ୟ ସାଧାରଣତଃ ରନ୍ଧା ହୋଇବା ଖାଦ୍ୟ ଅପେକ୍ଷା ଅଢଣ ଉ ସବର

ଦେଖି ପାତିକାକୁ ଡକାଇ ପଠାଇଲେ । ପାରିକ। ଅଭୁବବରଣ ଗଜାଙ୍କୁ ଜଣାଇଲା ଗଜା ଝଗଜ୍ୟରୁ ପଳାୟିତା ସେହି ଉଚ୍ଚବଣୀୟ ରମଣୀର ଭୂଇମୟି।ଦା ଅବଗଭ ହୋଇ ଭାହକୁ ଅପଣାଇ ଭଗିମ ଏବଂ ତାହାଙ୍କର ଶିଶୁ ପୁତ୍ର କୁ ଅପଣାର ଭଗିନେୟ ରୂପେ ଗ୍ରହଣ କଲେ ।

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B.

ଦନେ ଖ୍ରୀ%ଫର୍ କଲମ୍ବସ୍ ଅମ ୱଭ ହୋଇ ଫଙ୍ଗିନ ଓ ଇସ୍ବେଲଙ୍କ ସଙ୍ଗରେ ଘୋଜନ କରିବାକୁ ଯାଇଥିଲେ । ସେ ହ ଜେନୋଅ-ବବାସିକ ପ୍ରତ ଯେଉଁ ସରୁ ସମ୍ମାନ ଏକ ହୋଇଥିଲା, ସେଇ ପ୍ରଭ ଇର୍ଷାନ୍ତି ଭ ହୋଇ ଜଣେ ଅଭସ ଛଲେଇ କରି ତାଙ୍କୁ ପଶ୍ଚଭଲେ, “ ଭୂମ୍ଭ କ ମନେ କର ଯେ ଭୁମ୍ଭ

ନ ସଲେ, ଅଉ କେହି ନୂଇନ ମହାଦେଶକୁ ଅଷ୍କାର କରି ପାରନ୍ତା ନାହଁ । ନିଜ କରି ସମ୍ବନ୍ଧରେ କହିବାକୁ ଗଲେ, କାଲେ ସେ କଥା ଏ ବେଶି ବା ଅଭ ଉଣା ହୋଇ ପଡିବ, ଏହି ଭୟରେ ସେ କିଛି ଉତ୍ତର ଦେଲେ ନାହଁ, କିନ୍ତୁ ନିଜ ଅଙ୍ଗୁଲି ମଧ୍ୟରେ ଗୋiଏ ଅg ଧ୦, ଅଭିମାନଙ୍କୁ ଅଡ଼କୁ ଅନାଇ ସେ ଅଣ୍ଡକୁ ତାହାର ଏକ ପ୍ରା ଉପରେ ଠିଆ କରି ସେମାନେ କ ରଖି ପାରବେ, ବୋଲ ପରଲେ । କେହି ତାହା କହି ପାରିଲେ ନାହିଁ । ତହଁ କଲମ୍ବସ୍ ତାହାର ଏକ ପ୍ରାନ୍ତ ଫଇ ଦେଇ ତା ହାକୁ ସେହି ଅହର ପ୍ରାନ୍ତ ଉପରେ ଠିଆ କସ୍‌ଇ ପ୍ରଯୋଗୀମାନଙ୍କୁ ଦେଖାଇ ଦେଲେ ଯେ ଏପରେ ଏକ ସାମାନ୍ୟ କଳ୍ପନାରେ କଛୁ ବଶେଷ ଉତ୍କର୍ଷ ନାହଁ; ତଥାପି କୌଣସି ଅବଶ୍ଚରକ ପ୍ରଥମେ ସେସର ବାଧ ଦେଖାଇ ନ ଦେଲେ, ଏରୁ ଦ୍ଧି ଲେକଙ୍କ ମନକୁ ସହଜେ ଅସନ୍ତୁ। ହଁ । ସେ ଏଢନ୍ଦର ଭାକୁ ଅବଷ୍କାର-କେଉଁ ଇଣ୍ଟରଙ୍କଠାରେ ଅର୍ପଣ କଲେ ; ମାସ ଏବିଷୟରେ ସେ ସେ ପ୍ରଥମ ଅକୃଷ୍ପରକ, ସେତକ ମାକ ଖ୍ୟାତି ତାଙ୍କର ବୋଉ ଦାବ କରିଥଲେ ।

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MAHRATHI.

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A.

28

नरवारचा राजा मरण पावल्यावर त्याच्या भावाने राज्य बळकाविलें अाणि त्याच्या मार्म मुलाचा वारसदारीचा पम खुडविला तेव्हा विधवा राणीने भिका-याचा वेध घेऊन त्या अर्भकाला एका टोपलीत घातले व ती ठोपली हातावर घेऊन पश्चिम दिशेने रवाना झालो: जाता जाता

; तो हल्लीच्या जयपुरापासून पांच मेला पेक्षा कमी अंतरावर एक गांव होता तेथे घेऊन पोहोचली. भुकेने प्राणि श्रमाने व्याकुळ झाल्यामुळे तिने पापल्या हातांतील मालिक ओम खाली ठेवले fण अंगालो बो तोडीत होती तो एक नाग ठोपलीवर प्रापली फणा उभारीत प्राहे मासे तिया दृष्टीस पडलं तेव्हा तिन किवाळी फोडलो तो पकान एका फिरस्ता ब्राह्मण तेथे अाला. तो म्हणाला बाई तूं भिऊ नको, उलट संतोष मान, कारण हे या मुलाच्या भावी वैभवाचे निश्चयात्मक सूचक माहे . परंतु तीण झालेली ती माई म्हणालीपुढे होणार आहे तिकडे लक्ष देऊन काय करू? मी तर प्रातांच भुकोने मरत आहे. तेव्हां ब्राह्मणाने तिला पुढच्या गांवाच्या वाटेला लावून दिले आणि तिला

h सांगितले की

तुला

जें जें कांहीं पाहिजे आहे तें तें तेथें मिळेल तिने ठोपली उचलून घेतली आणि त्या गांवाला गेलो; त्याच्या सभोवार टेकड्या होत्या . तेथे पोहोचल्यावर तो एका वाई जवळ गेली आणि पोठाकरिता काही तरी मोलमजुरी द्यावी म्हणून तिची विनंति केली. कर्मधर्मसंयोगाने ती बाई तेथील राजाच्या पदरची दासी होतो. राणीच्या हुकमा बहन तिला ही दासी म्हणून चाकरीस ठेवले. एक दिवौं तिला स्वयंपाक करावयास लाविलें. तो तिच्या हतचा स्वयंपाक वहां राजाने खाल्ला तेव्हा मेहमींच्या भोजना पेक्षा त्याला तो फारच

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